सुवासरा विधानसभा में आयोजित हुई कथा ने पूरे मध्य प्रदेश के लोगो का अपनी ओर ध्यान खींचा...
सोशल मीडिया पर इन दिनों आचार्य धीरेंद्र शास्त्री ही छाए हुए है जिन्हे अब तक सुवासरा विधानसभा की जनता ने सिर्फ यूट्यूब और फेसबुक पर देखा था उन संत को अपने बीच पाकर हर व्यक्ति भावुक और उत्साहित रहा...बागेश्वर धाम सरकार को सुवासरा विधानसभा में लाने का पूरा श्रेय मंत्री हरदीप सिंह डंग को जाता है और क्षेत्र की जनता को इतने बड़े चमत्कारिक संत के दर्शन हो पाए उसके लिए भी मंत्री जी आप धन्यवाद के पात्र है !!!
कार्यकर्ता कह रहे डंग जी अब चलो दिल्ली !
वाह मंत्री जी जो काम राजस्थान के भीलवाड़ा , चित्तौड़ समेत मध्य प्रदेश के नीमच ,रतलाम, उज्जैन, इंदौर जैसे शहरों के नेता नहीं कर सके वह काम आपने सुवासरा विधानसभा में कर दिखाया
इतने बड़े संत को कथा के लिए सुवासरा विधानसभा में लाकर आपने अपनी ताकत का आभास सभी नेताओं को भी करा दिया और कार्यक्रम में चाहे इतनी संख्या में जनता बागेश्वर धाम सरकार को देखने आई हो लेकिन भारी भीड़ को देखते हुए और इतने बड़े आयोजन को देखते हुए सुवासरा विधानसभा की आसपास की 200 किलोमीटर तक के क्षेत्र में आपके नाम का डंका बज रहा है ?
कथा के बाद से आपके शुभचिंतक कह रहे है कि मंत्री जी चाहे तो बड़ा चुनाव भी लड़ सकते हैं दबी जुबान में कार्यकर्ता भी कह रहा है डंग जी अब चलो दिल्ली..!
मंत्री जी अब ये भी सुनिए...क्योंकि शायद सोशल मीडिया के फोटो, वीडियो की चकाचौंध के बीच यह बात आपको शायद कोई नही बताएगा
राजनीतिक क्षेत्र में सक्रिय कोई नेता या जनप्रतिनिधि जब इतना बड़ा आयोजन करता है वह भी चुनावी वर्ष में विधानसभा चुनाव से ठीक कुछ माह पहले तो निश्चित रूप से इसके सियासी मायने भी निकाले जाएंगे
कथा की तैयारी को लेकर जितनी बैठक आयोजित हुई उसमें आपने दोनों हाथ तीन तीन बार खड़े करवा करके यह कहा कि कथा कौन करवा रहा है ? अरे मज़ा नहीं आया दोई हाथ उठा के बोलो कथा कौन करवा रहा है ?
और सब ने हाथ खड़े करके कहा कि कथा हम करवा रहे हैं यानी की कथा की आयोजक हुई सुवासरा विधानसभा की आम जनता
तो जब आम जनता इस कथा की आयोजक थी तो उन्हें तपती धूप में टेंट के बाहर गर्मी में धक्के क्यों खाना पड़े ?
पंडाल के अंदर आने के लिए उसी आयोजक यानी की क्षेत्र की जनता को इतना संघर्ष क्यों करना पड़ा ?
बागेश्वर धाम सरकार की लोकप्रियता से सभी लोग परिचित हैं पूरी तरह से अनुमान था कि इतनी संख्या में लोग आएंगे तो फिर अव्यवस्था क्यों हुई ?
जब कथा की आयोजक आम जनता थी तो आम जनता को पीने का पानी क्यों नहीं मिल पाया ?
मंच के नजदीक जब वीआईपी लोग ठंडे मिनरल वाटर से अपनी प्यास बुझा रहे थे तो उसी आयोजक जनता को तपती धूप में टैंकर का गर्म पानी पीने के लिए मजबूर क्यों होना पड़ा ?
जबकि वीआईपी लोग ठंडे मिनरल वाटर का मजा ले रहे थे...कथा में हो रही इन अव्यवस्थाओं को देखकर सीतामऊ सुवासरा के स्थानीय 80 प्रतिशत लोग जो आपके मतदाता भी है वे लोग कथा पंडाल से दूर अपने घर पर ही लाइव कथा सुन रहे थे...क्षेत्र के युवा बड़ी संख्या में कन्हैया मित्तल के भजन सुनने पहुंचे थे लेकिन भजन संध्या में स्वयं कन्हैया मित्तल को मंच से तीन बार व्यवस्था को लेकर टोकना पड़ा !
आपने कथा की शुरुवात में एक अच्छा संदेश दिया की कथा में एक भी सोफा कुर्सी नही लगाया जाएगा यानी की वीआईपी कल्चर खत्म तो फिर मंच से लगी पहली दीर्घा में पत्रकारों की जगह पर भी कब्जा जमाकर बैठने वाले वीआईपी कौन थे ?
जिन लोगो को आपने मंच पर बुलाकर आरती करवाई और महाराज जी से दुपट्टा ओढ़ाकर स्वागत करवाया वो वीआईपी नही थे तो कौन थे ?
वीआईपी कल्चर खत्म करने का सबसे अच्छा उदाहरण तो स्वयं पंडित धीरेंद्र शास्त्री जी ने दिया जब वे दो बुजुर्गो को अपने साथ मंच पर ले आए तो फिर मंत्री जी आपने आम कार्यकर्ताओं में, पार्टी के पदाधिकारियों में, सेवादारों में और वीआईपी नेताओ के बीच ये भेदभाव क्यों पैदा होने दिया ?
और मंत्री जी यह भी सुनिए...जिन लोगों पर आपने भरोसा कर जिम्मेदारी दी थी वह वीआईपी सेवादार कथा के समय में हाथ में वाकी टाकी फोन लिए अपना झांकी मंडप कर मजे ले रहे थे और टेंट के बाहर की व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही थी
हमे पता है कि आप तन मन धन से आयोजन को सफल बनाने में लगे थे लेकिन आपके कई वीआईपी मेवादार आपके ही आयोजन की व्यवस्था में चार चांद लगाने में जुटे थे यह हमारा आंखो देखा हम आपको बयान कर रहे है !!!
हम चुप थे क्योंकि कथा के दौरान पूरे प्रदेश की नजरे इस आयोजन पर थी...हम भी चाहते है कि हमारे क्षेत्र से सकारात्मक और अच्छा संदेश अन्य क्षेत्र में जाए लेकिन इसकी जिम्मेदारी सबसे पहले आपकी है क्योंकि कथा के वास्तविक आयोजक आप हो
व्यवस्था में जुटा हर एक निस्वार्थ कार्यकर्ता और कई संगठन बधाई के पात्र है... खेजडिया सीतामऊ समेत क्षेत्र के स्थानीय निस्वार्थ सेवादारों ने व्यवस्था संभाली
निस्वार्थ कार्यकर्ताओं ने और संगठनों ने आयोजन में व्यवस्था की बचाई लाज...प्रशासन की मुस्तैदी से आयोजन संभव हो पाया
एक और जहां आप के विश्वासपात्र पूरी तरह से कथा के मजे ले रहे थे और गले में कार्ड टांगे हाथ में वायरलेस फोन लिए अपने आपमें वीआईपी बने घूम रहे थे वही ऐसे कार्यकर्ता जिनका शायद आपसे अभी तक कोई काम भी ना पड़ा हो उन कार्यकर्ताओं ने आपके इस बड़े आयोजन की व्यवस्था को संभाला है
ऐसे संगठन जिन्हें राजनीति से कोई लेना-देना नहीं उन संगठन के कार्यकर्ताओं ने मिलकर इस बड़े आयोजन में तन मन धन से सेवा की है ऐसे तमाम निस्वार्थ सेवादारों के जज्बे को हम सलाम करते है
नोट - कथा का विश्लेषण करने वाले हम कोई नही होते..ना ही कथा का और धार्मिक आयोजन का कभी विश्लेषण किया जा सकता है..कथा का मूल उद्देश्य तो भक्त को भगवान से जोड़ने का होता है जो बागेश्वर धाम सरकार की कथा में हुआ भी...लेकिन आयोजन से जुड़ी व्यवस्था अव्यवस्था के बारे में आम जन को और आपको बताना हमारा कर्तव्य भी है और अधिकार भी !!!
सीता राम